Tonsils बार-बार क्यों सूजते हैं? कारण, लक्षण और इलाज की पूरी जानकारी

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Illustration showing inflamed tonsils and throat infection to explain tonsillitis symptoms and causes in a medical context.
Tonsils सूजने का कारण, लक्षण, इलाज, घरेलू उपाय और बचाव की पूरी जानकारी जानें। यह आर्टिकल आसान भाषा में टॉन्सिलाइटिस को समझने में मदद करेगा।

टॉन्सिल हमारे शरीर के प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। ये गले के दोनों ओर मौजूद नरम ऊतक होते हैं जो बैक्टीरिया और वायरस को शरीर में प्रवेश करने से रोकते हैं। इन्हें गले के बॉडीगार्ड कहा जाता है क्योंकि ये हमारी सांस, खाने और बोलने के दौरान अंदर आने वाले कीटाणुओं से लड़ाई करते हैं। लेकिन जब यही टॉन्सिल बार-बार वायरस और बैक्टीरिया के संपर्क में आते हैं, तो उनमें सूजन हो जाती है जिसे टॉन्सिलाइटिस कहा जाता है।

आजकल बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर उम्र के लोग इस समस्या से परेशान दिखाई देते हैं। टॉन्सिल सूजने का कारण कई तरह के संक्रमण होते हैं, जिनमें वायरल इंफेक्शन सबसे ज्यादा होता है। फ्लू, सर्दी-जुकाम, कोरोना वायरस, एडेनो वायरस जैसे कई वायरस टॉन्सिल को तेज़ी से इंफेक्ट कर देते हैं। कई मामलों में बैक्टीरिया भी टॉन्सिलाइटिस का कारण बनता है, खासकर स्ट्रेप थ्रोट, जिसमें व्यक्ति के गले में तेज़ दर्द, सफेद परत और तेज़ बुखार दिखाई देता है। इसके अलावा मौसम बदलना, पॉल्यूशन, धूल, ठंडी चीजों का अधिक सेवन, गंदे हाथों से खाना, मुंह से सांस लेना और कमजोर इम्यून सिस्टम भी टॉन्सिल के सामान्य कारण हैं।

टॉन्सिल का दर्द अक्सर बहुत तेज़ महसूस होता है। ऐसा लगता है जैसे गले में कोई कांटा अटका हुआ है। निगलते समय दर्द और बढ़ जाता है। कई लोगों को बोलने में भी दर्द होने लगता है और सुबह-सुबह गले में सूजन ज्यादा महसूस होती है। टॉन्सिलाइटिस में गले में व्याकुलता, लालपन, सूजन, सफेद परत, बदबूदार सांस और बुखार जैसे लक्षण भी साथ दिखाई देते हैं। कई बार गर्दन के पास की ग्रंथियाँ भी सूज जाती हैं जिससे भारीपन और हल्का दर्द महसूस होता है। विशेष रूप से बच्चों में टॉन्सिल का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता। स्कूलों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बच्चे आसानी से संक्रमण पकड़ लेते हैं, जिससे उन्हें बार-बार बुखार, गले में दर्द और खाने निगलने में समस्या होने लगती है।

टॉन्सिल कभी-कभी गंभीर भी हो सकते हैं, खासकर जब सूजन बहुत ज्यादा हो जाए और सांस लेने में दिक्कत होने लगे। कई बार टॉन्सिल में इतना संक्रमण हो जाता है कि पस का थैला बन जाता है जिसे चिकित्सकीय तौर पर एब्सेस कहा जाता है। इससे कानों में दर्द, तेज़ बुखार और लगातार गले में सूजन बनी रहती है। कुछ लोगों में टॉन्सिल बार-बार आने की समस्या को रिकरिंग टॉन्सिलाइटिस कहते हैं, जिसमें महीने में दो-तीन बार भी इंफेक्शन हो सकता है। यह आगे चलकर क्रॉनिक टॉन्सिलाइटिस का रूप ले सकता है, जिसमें टॉन्सिल हमेशा थोड़ा-बहुत सूजा हुआ रहता है और पूरी तरह ठीक नहीं होता।

टॉन्सिल का संक्रमण छींक, खांसी, गंदे हाथ, संक्रमित भोजन और दूषित पानी के कारण फैल सकता है। इसलिए आमतौर पर सर्दी-जुकाम के दौरान और स्कूलों में टॉन्सिल के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। इसका इलाज मुख्य रूप से संक्रमण के कारण पर निर्भर करता है। वायरल टॉन्सिलाइटिस कुछ ही दिनों में आराम करता है और घर पर देखभाल से ठीक हो सकता है। इसमें गर्म पानी पीना, नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करना, स्टीम लेना और गले को आराम देना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। अगर टॉन्सिल बैक्टीरियल कारणों से हुआ है तो डॉक्टर एंटीबायोटिक देते हैं, जिसे पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी है। दर्द और बुखार कम करने के लिए पेरासिटामोल या आइबुप्रोफेन ली जाती है। विटामिन-C, हल्का गर्म भोजन, हल्दी वाला दूध और हाइड्रेशन टॉन्सिल के इलाज में काफी मदद करते हैं।

कई लोग चिंतित रहते हैं कि क्या टॉन्सिल हटाने की जरूरत पड़ेगी। वास्तव में टॉन्सिल हटाना (टॉन्सिलेक्टॉमी) तभी आवश्यक होता है जब टॉन्सिल बार-बार सूजते हों, साल में छह से अधिक बार टॉन्सिलाइटिस हो, गले की सूजन के कारण खाना निगलने में दिक्कत हो, सांस लेने में समस्या हो रही हो, नींद में खर्राटे या रुक-रुक कर सांस आ रही हो या बार-बार तेज़ बुखार आ रहा हो। टॉन्सिल हटाने की सर्जरी बहुत सुरक्षित है और कुछ ही दिनों में व्यक्ति पूरी तरह ठीक हो जाता है।

टॉन्सिल से बचाव के लिए गले की स्वच्छता और सही आदतें जरूरी हैं। ठंडी और बर्फ वाली चीजें कम खानी चाहिए, दिन में कई बार गुनगुना पानी पीना चाहिए और मौसम बदलते समय खास ध्यान देना चाहिए। धूल और पॉल्यूशन से बचने के लिए मास्क पहनना जरूरी है। हाथों को बार-बार धोना, संतुलित आहार लेना, पर्याप्त नींद लेना और इम्यून सिस्टम मजबूत रखना टॉन्सिल से बचाने में बेहद प्रभावी हैं। तेज़ बोलने, चिल्लाने या गले पर जोर डालने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे गले की नाजुक झिल्ली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

अंत में यह समझना जरूरी है कि टॉन्सिल शरीर की सुरक्षा का आवश्यक हिस्सा हैं, लेकिन जब वे बार-बार सूजने और दर्द देने लगें तो यह संकेत होता है कि शरीर किसी गंभीर संक्रमण से लड़ रहा है। टॉन्सिल को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर पहचान, घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह और उचित दवाइयाँ टॉन्सिल को पूरी तरह ठीक कर सकती हैं। अगर ये समस्या बार-बार आ रही है, तो समय रहते विशेषज्ञ से मिलकर इलाज करवाना सबसे बेहतर होता है। सही देखभाल और जागरूकता से टॉन्सिल की समस्या को हमेशा नियंत्रण में रखा जा सकता है।

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