
किडनी स्टोन, जिसे हम गुर्दे की पथरी भी कहते हैं, आज एक बहुत आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। यह तब बनती है जब हमारे शरीर में मौजूद खनिज (minerals) और नमक (salts) एक साथ इकट्ठा होकर छोटे-छोटे क्रिस्टल के रूप में जमा हो जाते हैं। धीरे-धीरे ये क्रिस्टल एक ठोस पथरी (stone) का रूप ले लेते हैं। किडनी स्टोन ज्यादातर उन लोगों में पाई जाती है जो पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते या जिनका खान-पान असंतुलित होता है।
किडनी में स्टोन बनने के कई कारण हो सकते हैं। सबसे पहला और बड़ा कारण है — पानी की कमी। जब शरीर में पानी की मात्रा कम होती है, तो पेशाब (urine) गाढ़ा हो जाता है, जिससे उसमें मौजूद मिनरल्स एक जगह इकट्ठा होने लगते हैं। इसके अलावा बहुत अधिक नमक, प्रोटीन या non-veg का सेवन भी किडनी में कैल्शियम और यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ा देता है, जो पथरी बनने का कारण बनता है। कुछ लोगों में यह समस्या जेनेटिक भी होती है, यानी अगर परिवार में किसी को यह बीमारी रही हो तो अगली पीढ़ी में भी इसका खतरा बढ़ जाता है।
किडनी स्टोन चार प्रकार के होते हैं — Calcium Oxalate Stone, Uric Acid Stone, Struvite Stone और Cystine Stone। इनमें से सबसे आम प्रकार Calcium Oxalate Stone होता है, जो शरीर में कैल्शियम और ऑक्सलेट के मिल जाने से बनता है। वहीं Uric Acid Stone उन लोगों में पाया जाता है जो बहुत ज्यादा मांस या प्रोटीन लेते हैं। Struvite Stone अक्सर पेशाब में संक्रमण (UTI) के बाद बनते हैं और बहुत तेजी से बढ़ते हैं। Cystine Stone दुर्लभ होते हैं और ये अनुवांशिक कारणों से बनते हैं।
किडनी स्टोन के लक्षण शुरुआत में बहुत हल्के हो सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे पथरी बढ़ती है, दर्द भी बढ़ता जाता है। आम लक्षणों में पीठ या कमर के नीचे तेज दर्द होना, पेशाब करते समय जलन महसूस होना, मूत्र में खून या बदबू आना, बार-बार पेशाब की इच्छा होना और कभी-कभी उल्टी या मितली शामिल हैं। अगर दर्द बहुत ज्यादा हो जाए या बुखार आना शुरू हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
किडनी स्टोन से बचने का सबसे अच्छा तरीका है शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना। हर दिन कम से कम 8–10 गिलास पानी जरूर पीएं। ज्यादा नमक, सोडा, चाय और कॉफी का सेवन कम करें। फलों और हरी सब्ज़ियों को अपने आहार में शामिल करें और अपने वजन को नियंत्रण में रखें। अगर आप calcium supplement लेते हैं तो उसे केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लें।
किडनी स्टोन का इलाज उसके आकार और स्थिति पर निर्भर करता है। अगर पथरी बहुत छोटी है (5mm से कम), तो यह सामान्य रूप से पेशाब के जरिए खुद बाहर निकल सकती है। इस दौरान ज्यादा पानी पीना और दर्द के लिए दवाइयाँ लेना पर्याप्त होता है। अगर पथरी थोड़ी बड़ी है (5–10mm), तो डॉक्टर shock wave therapy (ESWL) का उपयोग कर सकते हैं, जिससे पथरी छोटे टुकड़ों में टूट जाती है। लेकिन अगर stone 10mm से बड़ा है या मूत्र मार्ग में फंस गया है, तो surgery या laser treatment जैसे advanced तरीके अपनाने पड़ते हैं, जैसे Ureteroscopy या PCNL (Percutaneous Nephrolithotomy)।
अगर दोनों किडनी में एक साथ पथरी हो जाए, तो यह स्थिति बहुत गंभीर हो सकती है। दोनों तरफ blockage होने से पेशाब का फ्लो रुक सकता है और शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। इससे किडनी फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है, और मरीज को dialysis या kidney transplant तक की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते जांच करवानी चाहिए।
कुल मिलाकर, किडनी स्टोन कोई मामूली बीमारी नहीं है। यह हमारे खान-पान, पानी पीने की आदत और जीवनशैली पर निर्भर करती है। अगर आप दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, ज्यादा नमक या प्रोटीन से बचें और अपनी सेहत की नियमित जांच करवाएं, तो इस बीमारी से आसानी से बचा जा सकता है।
