कितनी खतरनाक बीमारी है? क्या यह जानलेवा हो सकती है | पूरी जानकारी हिंदी में

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Dementia is a life-threatening brain disease that slowly destroys memory and identity in elderly people

Dementia is a silent and life-threatening condition that gradually affects memory, thinking, and daily life

सोचिए… एक दिन ऐसा आए कि आप अपने ही बेटे का नाम भूल जाएँ जी हाँ सोच के ही बुरा लगता हैं औरअपने घर का रास्ता याद न रहे और आईने में दिख रहा चेहरा आपको अपना ही न लगे ऐसा भी हो सकता हैं…

यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि डिमेंशिया नाम की उस खामोश बीमारी की हकीकत है, जो इंसान को ज़िंदा रहते हुए भी धीरे-धीरे खुद से छीन लेती है जी हाँ
सबसे डरावनी बात यह है कि लोग इसे अक्सर उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं — और तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

यह कितनी खतरनाक बीमारी है? क्या यह सच में जानलेवा हो सकती है?

आज दुनिया भर में करोड़ों लोग डिमेंशिया (Dementia) से जूझ रहे हैं भारत में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद जागरूकता बेहद कम है। अधिकतर लोग यही सोचते हैं कि डिमेंशिया सिर्फ भूलने की बीमारी है, जबकि सच्चाई यह है कि यह इंसान की पूरी पहचान, सोच और अस्तित्व को धीरे-धीरे खत्म कर देती है।

डिमेंशिया क्या होता है? (सिर्फ भूलने की बीमारी नहीं)

डिमेंशिया कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि दिमाग से जुड़े कई लक्षणों का समूह है। इसमें दिमाग की कोशिकाएँ धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं, जिससे व्यक्ति की:
याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता, बोलने की शक्ति,फैसले लेने की समझ
ये सब कमजोर होती जाती है।

सबसे आम प्रकार है Alzheimer’s Disease, जो लगभग 60–70% मामलों में पाया जाता है।

शुरुआत में दिखने वाले संकेत जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं

डिमेंशिया की सबसे खतरनाक बात यही है कि यह चुपचाप शुरू होता है।
शुरुआती लक्षण इतने सामान्य लगते हैं कि लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते।

व्यक्ति बार-बार एक ही सवाल पूछने लगता है, चीजें रखकर भूल जाता है, बातचीत के बीच शब्द भूल जाता है और धीरे-धीरे लोगों से कटने लगता है यही वो स्टेज होती है जहाँ सही समय पर ध्यान दिया जाए तो हालात बिगड़ने से रोके जा सकते हैं या इसे कम किया जा सकता है.

क्या डिमेंशिया वाकई खतरनाक बीमारी है?

जी हाँ डिमेंशिया बेहद खतरनाक बीमारी है, क्योंकि यह सिर्फ दिमाग ही नहीं, पूरे जीवन को प्रभावित करती है।

एक समय ऐसा आता है जब मरीज:
खुद खाना नहीं खा पाता, बाथरूम जाना भूल जाता है, अपने ही घर में रास्ता भटक जाता है,और कभी-कभी आक्रामक या पूरी तरह शांत हो जाता है इस स्टेज पर मरीज पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो जाता है जैसे आपको हल ही में आई बॉलीवुड मूवी सैयारा में देखने को मिला।

क्या डिमेंशिया जानलेवा हो सकता है? (सबसे अहम सवाल)

सीधा जवाब है — हाँ, डिमेंशिया जानलेवा बन सकता है हालाँकि डिमेंशिया सीधे मौत का कारण नहीं लिखा जाता, लेकिन इसके कारण पैदा होने वाली जटिलताएँ मौत तक ले जा सकती हैं।

डिमेंशिया के आख़िरी स्टेज में मरीज: बार-बार गिरने लगता है, खाना निगल नहीं पाता (कुपोषण), शरीर की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है, निमोनिया और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है

इन्हीं कारणों से दुनियाभर में डिमेंशिया को Life-Threatening Condition माना जाता है।

डिमेंशिया का मरीज कितने साल जीवित रहता है?

यह सवाल हर परिवार के मन में होता है।
आमतौर पर डिमेंशिया की पहचान के बाद मरीज 8 से 10 साल तक जीवित रह सकता है, लेकिन यह बीमारी के प्रकार, उम्र और देखभाल पर निर्भर करता है कुछ मामलों में बीमारी तेजी से बढ़ती है, तो कुछ में धीरे-धीरे।

क्या डिमेंशिया का इलाज संभव है?

फिलहाल डिमेंशिया का कोई स्थायी इलाज नहीं है, और यही इसे और डरावना बनाता है हालाँकि दवाओं और सही लाइफस्टाइल से इसके असर को धीमा किया जा सकता है।
समय पर पहचान होने से मरीज की: मानसिक स्थिति, जीवन-गुणवत्ता, और आत्मनिर्भरता कुछ समय तक बचाई जा सकती है।

डिमेंशिया से बचाव कैसे करें? (जो आज कर सकते हैं)

पूरी तरह बचाव संभव नहीं, लेकिन जोखिम कम किया जा सकता है।
नियमित व्यायाम, हेल्दी डाइट, ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल, धूम्रपान से दूरी और दिमाग को एक्टिव रखने वाली आदतें डिमेंशिया के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

निष्कर्ष

डिमेंशिया सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि यह इंसान की यादों, रिश्तों और पहचान की धीमी मौत है सबसे डरावनी बात यह है कि इसका एहसास तब होता है, जब लौटने का रास्ता लगभग खत्म हो चुका होता है।

अगर आपके घर में कोई बुज़ुर्ग बार-बार भूलने लगे, तो इसे उम्र का असर समझकर नजरअंदाज न करें।
शायद आपकी जागरूकता किसी की पूरी ज़िंदगी बचा सकती है।

Disclaimer

इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य शैक्षणिक और जागरूकता उद्देश्य के लिए है यह किसी भी प्रकार से चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है डिमेंशिया या किसी भी मानसिक/शारीरिक बीमारी से जुड़े लक्षण दिखाई देने पर योग्य डॉक्टर, न्यूरोलॉजिस्ट या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

लेख में बताई गई जानकारी विभिन्न सामान्य स्रोतों और स्वास्थ्य जागरूकता पर आधारित है। किसी भी दवा, उपचार या जीवनशैली में बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। लेखक और वेबसाइट इस जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी नुकसान या परिणाम के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

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