कैसे आपकी आँखों से पता चल सकता है आपकी हेल्थ और उम्र के बारे में –
क्या आप जानते हैं आपकी आँखें सिर्फ देखने का काम ही नहीं करतीं—ये आपके शरीर की असली हेल्थ रिपोर्ट भी होती हैं। आंखों को हमेशा आत्मा का दर्पण कहा गया है, लेकिन अब वैज्ञानिक कह रहे हैं—आँखें आपके शरीर की असली सेहत और उम्र का राज भी खोल देती हैं!
कनाडा की McMaster University के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी खोज की है जिसने मेडिकल साइंस की दुनिया को चौंका दिया है। उनका कहना है कि सिर्फ आंखों की एक साधारण रेटिना स्कैन देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि दिल का स्वास्थ्य कितना अच्छा है और शरीर कितनी तेजी से बूढ़ा हो रहा है।
क्या हो अगर आपका डॉक्टर सिर्फ आपकी आँखों को देखकर यह बता दे कि आपको दिल की बीमारी होने का खतरा है या नहीं? सुनने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन हाल ही में हुई एक वैज्ञानिक खोज ने चिकित्सा जगत को हैरान कर दिया है। कनाडा के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि सिर्फ आपकी आँखों में मौजूद छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं को स्कैन करके यह पता लगाया जा सकता है कि आप जैविक रूप से कितनी तेजी से बूढ़े हो रहे हैं और आपको हार्ट डिज़ीज़ का खतरा कितना है।
धुंधली आंखें अक्सर बताते हैं कि शरीर में विटामिन A, ओमेगा-3 या पानी की कमी है। आंखों के नीचे काले घेरे दिखाई देना सिर्फ थकान का परिणाम नहीं बल्कि एनीमिया, तनाव, एलर्जी और खराब खान-पान की वजह से भी होता है। पुतलियों को देखें तो यह हमारे दिमाग के स्वास्थ्य की सीधी खबर देती हैं—
दरअसल, आँखें सिर्फ हमारी आत्मा की खिड़की नहीं हैं—अब वे हमारी सेहत का भविष्य बताने वाली मेडिकल स्क्रीन भी बन सकती हैं। कनाडा की McMaster University में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि आँख की रेटिना में मौजूद छोटी रक्त वाहिकाएँ (retinal vessels) शरीर की संपूर्ण वैस्कुलर स्वास्थ्य स्थिति को दर्शाती हैं। यानी, अगर इन रक्त वाहिकाओं में बदलाव होता है तो इसका मतलब है कि शरीर के अंदर भी कुछ गड़बड़ चल रही है—खासकर दिल और खून की नलिकाओं में।
यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Science Advances में प्रकाशित हुआ है और इसकी अगुवाई कनाडा की शोधकर्ता डॉ. मैरी पिगेयर (Marie Pigeyre) ने की है। इस रिसर्च में 74,000 लोगों की आँखों की रेटिना स्कैन इमेज, जेनेटिक डेटा और खून की जांच को जोड़ा गया। इसके बाद जो सामने आया वह मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
रिसर्च में पाया गया कि जिन लोगों की रेटिना में रक्त वाहिकाएँ सरल संरचना वाली थीं और जिनमें कम शाखाएँ थीं, उन लोगों में दिल की बीमारियों का खतरा अधिक पाया गया। ऐसे लोगों में जैविक उम्र (Biological Ageing) भी तेज पाई गई, चाहे उनकी वास्तविक उम्र कम ही क्यों न रही हो। इसका कारण यह है कि जब शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ती है और खून का प्रवाह प्रभावित होता है, तो इसकी झलक सबसे पहले आँखों में दिखती है।
वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च में दो खास प्रोटीन भी खोजे—MMP12 और IgG-Fc receptor IIb। ये दोनों प्रोटीन शरीर में वृद्धावस्था को तेज करने, दिल की बीमारी बढ़ाने और खून की नलियों को नुकसान पहुँचाने से जुड़े पाए गए। डॉ. मैरी पिगेयर के अनुसार ये प्रोटीन भविष्य में एंटी-एजिंग दवाओं या हृदय रोगों को रोकने वाली दवाओं के विकास के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य बन सकते हैं।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये पूरा परीक्षण आँखों की रेटिना स्कैन के माध्यम से किया गया और इसमें किसी प्रकार की सुई, दर्द या जटिल प्रक्रिया शामिल नहीं थी। यानी यह एक आसान, तेज और सटीक हेल्थ चेकअप सिस्टम बन सकता है—खासकर उन देशों में जहाँ मेडिकल जांच की सुविधा हर किसी को उपलब्ध नहीं। अभी तो यह रिसर्च शुरुआती स्तर पर है, लेकिन वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले समय में आँखों के स्कैन से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम पहले ही जानकर सचेत हुआ जा सकेगा।
Conclusion :
आँखें सिर्फ देखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि अब ये हमारी दिल की सेहत और बढ़ती उम्र का राज भी खोल सकती हैं। मेडिकल विज्ञान अब इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगर यह तकनीक आम लोगों तक पहुँचती है, तो हेल्थकेयर में क्रांति आ सकती है—वह भी बिना किसी दर्द, महंगे टेस्ट या समय बर्बाद किए।

