आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम हर चीज़ का इलाज ढूंढ लेते हैं—सर्दी, खांसी, बुखार, दर्द… लेकिन जब बात आती है पाइल्स (बवासीर) की, तो ज़्यादातर लोग चुप रह जाते हैं। जी हाँ शर्म, झिझक और डर के कारण यह बीमारी धीरे-धीरे अंदर से खतरनाक रूप ले लेती है। असल में पाइल्स कोई मामूली बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर की एक ऐसी चेतावनी है जो बताती है कि हमारी जीवनशैली और खानपान दोनों ही असंतुलित हो चुके हैं।
(Piles) पाइल्स क्या है
पाइल्स या बवासीर गुदा (anus) के अंदर या बाहर बनने वाली सूजी हुई नसें (swollen veins) होती हैं, जो लंबे समय तक कब्ज, गलत खानपान, या अत्यधिक प्रेशर डालने से बन जाती हैं। जब ये नसें सूजकर गांठ या मस्से का रूप ले लेती हैं, तब व्यक्ति को मल त्याग के दौरान दर्द, जलन, खून आना और असहनीय तकलीफ़ होती है।
पाइल्स दो प्रकार की होती हैं:
• आंतरिक पाइल्स (Internal Piles) — जो गुदा के अंदर होती हैं और शुरुआत में खून निकलने से पहचान में आती हैं।
• बाहरी पाइल्स (External Piles) — जो गुदा के बाहर मस्सों के रूप में दिखती हैं और बेहद दर्दनाक होती हैं।
कैसे शुरू होती है ये बीमारी – एक सच्ची कहानी
दिल्ली के रहने वाले अरुण कुमार (उम्र 35 साल) एक प्राइवेट बैंक में काम करते हैं। सुबह 9 बजे की ड्यूटी और रात 8 बजे तक लगातार कुर्सी पर बैठना उनका रोज़ का रूटीन था। जल्दी-जल्दी में नाश्ता छोड़ देना और शाम को तला-भुना खाना खाकर सीधे सो जाना — यही उनकी दिनचर्या थी।
एक दिन उन्होंने देखा कि मल त्याग के दौरान खून आ रहा है। उन्होंने सोचा “शायद कुछ खाया होगा…” और इग्नोर कर दिया। धीरे-धीरे दर्द बढ़ने लगा, बैठना मुश्किल हो गया और ऑफिस में शर्मिंदगी होने लगी। जब डॉक्टर के पास पहुंचे तो पता चला कि उन्हें ग्रेड-3 पाइल्स है — जो सर्जरी के बिना ठीक होना मुश्किल था।
अरुण की कहानी उन लाखों लोगों जैसी है जो इस बीमारी को शुरुआत में नज़रअंदाज़ कर देते हैं और बाद में पछताते हैं।
पाइल्स के मुख्य कारण
पाइल्स अचानक नहीं होती, ये धीरे-धीरे बढ़ती है। इसके पीछे हमारी आदतें ही सबसे बड़ी वजह हैं:
• लगातार कब्ज रहना – मल त्याग के दौरान बार-बार ज़ोर लगाना
• फाइबर की कमी – भोजन में हरी सब्ज़ियाँ, फल, और रेशेदार चीज़ों का अभाव
• पानी कम पीना – शरीर में डिहाइड्रेशन से पाचन कमजोर होना
• ज्यादा देर तक बैठना – ऑफिस जॉब, ड्राइवर या टीवी देखने की आदत
• तनाव और अनियमित दिनचर्या – जिससे पाचन तंत्र प्रभावित होता है
• गर्भावस्था और मोटापा – शरीर पर दबाव बढ़ने से नसों में सूजन
पाइल्स के लक्षण जो नज़रअंदाज़ नहीं करने चाहिए
1. मल त्याग के दौरान या बाद में खून आना
2. गुदा के पास दर्द, जलन या खुजली होना
3. बैठने में असहजता
4. गुदा के पास गांठ या मस्से का अहसास
5. मल पूरी तरह साफ़ न होना
इन लक्षणों को अगर शुरुआत में ही पहचान लिया जाए और इलाज शुरू कर दिया जाए, तो सर्जरी तक बात नहीं पहुंचती।
क्या पाइल्स से जान का खतरा हो सकता है?
सीधे तौर पर पाइल्स से जान जाने का खतरा कम होता है, लेकिन अगर इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है। लगातार खून निकलने से एनीमिया (खून की कमी) हो सकती है, और इंफेक्शन फैलने पर गुदा की नसें सड़ने तक की स्थिति आ जाती है। कुछ मामलों में यह कैंसर जैसी जटिल बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। इसलिए इसे “साधारण समस्या” मानकर नज़रअंदाज़ करना खतरनाक साबित हो सकता है।
इलाज के तरीके – घरेलू से लेकर आधुनिक तक
पाइल्स का इलाज अब कई तरीकों से संभव है, लेकिन कौन-सा तरीका आपके लिए सही है, ये डॉक्टर की जांच के बाद ही तय होता है।
- घरेलू और प्राकृतिक उपाय:
• रोज़ सुबह गुनगुना पानी पीकर दिन की शुरुआत करें।
• भोजन में फाइबर, सलाद और छाछ ज़रूर शामिल करें।
• एलोवेरा जेल या नारियल तेल लगाने से बाहरी पाइल्स में राहत मिलती है।
• ईसबगोल या त्रिफला पाउडर का सेवन कब्ज कम करता है। - दवाइयाँ और मेडिकल ट्रीटमेंट:
शुरुआती स्टेज में डॉक्टर मलहम, दवाइयाँ और दर्द निवारक देते हैं जो सूजन और दर्द को कम करती हैं। - लेजर या सर्जरी:
अगर बीमारी तीसरे या चौथे चरण में पहुँच जाए तो लेज़र सर्जरी सबसे प्रभावी मानी जाती है। इसमें दर्द कम और रिकवरी तेज़ होती है।
कैसे बचें पाइल्स से – Prevention ही सबसे अच्छा इलाज है
• रोज़ाना कम से कम 2-3 लीटर पानी पिएं।
• भोजन में रेशेदार आहार लें — दलिया, ओट्स, फल, सब्ज़ियाँ।
• लंबे समय तक बैठने से बचें, हर घंटे कुछ मिनट टहलें।
• टॉयलेट में मोबाइल का उपयोग न करें, समय न बढ़ाएँ।
• शराब और मसालेदार चीज़ों का सेवन सीमित करें।
• सुबह का नाश्ता कभी न छोड़ें — क्योंकि यही पाचन को नियंत्रित रखता है।
सबसे बड़ी गलती
पाइल्स के मरीजों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीमारी नहीं, बल्कि शर्म और चुप्पी होती है।
कई लोग इस विषय पर बात करने में झिझकते हैं, डॉक्टर से परामर्श लेने में देर कर देते हैं। यही कारण है कि यह समस्या “साइलेंट डिसीज़” बन चुकी है।
जी हाँ अगर किसी को खांसी या बुखार होता है तो वह खुलकर बात करता है, लेकिन जब बवासीर होती है, तो वह छिपाता है — और यहीं से यह बीमारी जानलेवा रूप लेने लगती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
पाइल्स कोई लाइलाज या शर्म की बीमारी नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर का एक संकेत है कि हमें अपनी जीवनशैली बदलने की ज़रूरत है। समय पर इलाज और सही खानपान से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।

